शरीर के लिए नींद आवश्यक है । थकान मिट जाती है ।
मन भी स्फूर्ति पाता है। नींद में शरीर और मन को ताजा रखने की शक्ति है।
सारा शरीर शिथिल हो जाता है। विद्वानों ने जीवन और मृत्यु की भी तुलना
जागृतिअवस्था और शुशुप्तावस्था से की है। सारा शरीर निष्क्रिय हो जाता है।
सो जाता है। पैर साँस चलती रहती है। प्राण जगा रहता है। यह साँस ही तो इश्वरीय अंग है।
वेदांत में कहा गया है- " ऐशु सुप्तेषु जागर्ति अर्थात जब सारी प्रकृति और सृष्टी सो जाती है
तो इश्वर जगा रहता है। प्राण भी इश्वर का अंस है। इसलिए सभी इन्द्रियों के सो जाने पैर
भी प्राण जगा रहता है।
Thursday, July 23, 2009
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nid nahi aayegi to phir kya karo ge
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