Thursday, July 23, 2009

जागो रे

शरीर के लिए नींद आवश्यक है । थकान मिट जाती है ।
मन भी स्फूर्ति पाता है। नींद में शरीर और मन को ताजा रखने की शक्ति है।
सारा शरीर शिथिल हो जाता है। विद्वानों ने जीवन और मृत्यु की भी तुलना
जागृतिअवस्था और शुशुप्तावस्था से की है। सारा शरीर निष्क्रिय हो जाता है।
सो जाता है। पैर साँस चलती रहती है। प्राण जगा रहता है। यह साँस ही तो इश्वरीय अंग है।
वेदांत में कहा गया है- " ऐशु सुप्तेषु जागर्ति अर्थात जब सारी प्रकृति और सृष्टी सो जाती है
तो इश्वर जगा रहता है। प्राण भी इश्वर का अंस है। इसलिए सभी इन्द्रियों के सो जाने पैर
भी प्राण जगा रहता है।

Thursday, May 21, 2009

बिजली की किल्लत

चुनाव की सरगर्मियों में बिजली की किल्लत पता नही चली । चड़ता पारा और बिजली की आवाजाही आम जन जीवन दुष्कर हो गया। बिजली विभाग को विजली की सप्लाई नियमित करनी ही होगी जिससे जनजीवन सामान्य हो सके।

Wednesday, May 20, 2009

प्रोफेशनल शिक्षा की स्थिति

प्रोफेशनल शिक्षा आज शिक्षा नही बल्कि मज़ाक और व्यापार बन गई है । इसकी तरफ़ धयान नही दिया जा रहा है। अगर यही स्थिति रही तो न जाने कितने विद्यार्थी इस शिक्षा से वंचित रह जाएगे। जो विद्यार्थी गुरु की चापलूसी करता है उसको क्लास में मान सम्मान के साथ साथ अच्छे अंक भी मिलते है पर जो विद्यार्थी ऐसा नही करते उनको मान सम्मान के साथ साथ अच्छे अंक से भी वंचित कर दिया जाता है । यह बात एक गुरु के लिए शोभा नही देती । गुरु को अपने आचरण में बदलाव लाना चाहिए जिससे गुरु और शिष्य के बीच मधुर सम्बन्ध बरकरार बनी रहे ।

मनमोहन की दुबारा ताजपोशी

यूपी तो हमारी है अब दिल्ली की बारी है ।
लाख दावों के बाद भी मायावती सरकार अपनी सोशल इंजीनियरिंग में फेल हो गई ।
कांग्रेस को जहाँ एक जमीन मिली वहीं केन्द्र को स्थायित्व। जनता ने अपनी मत का
इजहार कर दिया है। अब मनमोहन की दुबारा ताजपोशी होगी
अब पछताए का होत जब चिडिया चुक गई खेत

सन्देश दोस्तों को

दोस्ती की परिभाषा क्या होती है उसे शब्दों में नही लिखा जा सकता है। एक मित्र जो कि सुख - दुःख में हमारा साथ देता है उसको कभी भुलाया नही जा सकता है । जिसका कोई न हो उसका दोस्त ही सब कुछ होता है। मुझे शिक्षा के दौरान जो मित्र मिले है , दो साल में जो सफलता हमने अर्जित की है। उसमे हमारे मित्रो की अहम् भूमिका है । मै उनको धन्यवाद देता हूँ।

Sunday, May 17, 2009

क्या सुख क्या दुःख

इन्सान जब धरती पर जन्म लेता है तो वह अपने साथ ढेर सरे सपने लेकर आता है। धीरे धीरे जब वह बड़ा होता है तो वह अपने सपने को साकार करता है । अपनी मंजिल तक पहुचने में उसके सामने ढेर सारी दिक्कते आती है। यदि वह साहसी तो ठीक है अन्यथा वह विचलित हो जाता है उसको समझ में नही आता कि वह क्या करे ? क्या उसके जीवन में यही दिन देखने को है । जब इस संसार में दुखो का भंडार है तो खुशियों का संसार किस धरती पर है ? क्या इस धरती पर मन को शांत करने के लिए आसुओ कि बारिश होती है ? कब वह समय आएगा जब सुखो का भंडार होगा ?

दहेज लेना देना बुरा नही

लोग कहते है की दहेज प्रथा भारत बहुत बड़ी सामाजिक बुराइयों में से एक है । आए दिन दहेज के कारन कुकृत्य के समाचार सुनने को मिलते है। लेकिन वास्तव में देखा जाए तो इस प्रथा में कोई बुराई नही है। मेरा मानना है की यह एक स्वस्थ रिवाज़ है नकदी या उपहार के रूप में नव विवाहित जोड़े को जो कुछ दिया जाता है उससे वे आसानी से अपना जीवन प्रारम्भ कर सकते है । दहेज़ प्रथा भारतीय समाज की ही प्रथा नही है यह हमे हमारे भूतकाल में विरासत में मिली है। दुसरे देसों में भी यह प्रथा है की माता पिता नव विवाहित जोड़े को उपहार और भेंट देते है । मेरा मानना है की जो जिस तरह का है उसे उस हिसाब से दहेज लेने देना चाहिए ।

पैसे की भूख

आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया
पैसे की आवश्यकता सभी को है ।
चाहे वह एक साधारण इंसान हो या बड़े
घराने का । सरकारी नौकरी करने वाला
ब्यक्ति भी पैसे के लिए बेचैन है। जिसके पास पैसा है
उसके पास मान , सम्मान , शोहरत है, जिसके पास नही है
उसकी समाज में कोई इज्जत नही होती है। ये कैसा रिश्ता है पैसे और इन्सान में । काश कभी ऐसा होता जब पैसे का बीज बोया जाता और उसकी फसल काटने पर काफी पैसा मिलता ।